जिस शिक्षा से हम अपना
जीवन निर्माण कर सके, मनुष्य बन सके
सुचरित्र गठन कर सके
और विचारों का सामंजस्य कर सके
वही वास्तव में शिक्षा कहलाने के योग्य है।
जीवन निर्माण कर सके, मनुष्य बन सके
सुचरित्र गठन कर सके
और विचारों का सामंजस्य कर सके
वही वास्तव में शिक्षा कहलाने के योग्य है।
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