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कामयाबी और नाकामयाबी
दोनो ज़िन्दगी के अहम हिस्से है
और दोनों ही किसी के जीवन
में स्थायी नही है।
हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते।
भरोसा किया जाए या नहीं,
ये जानने का सबसे आसान तरीका ये है
कि भरोसा किया जाए।
ना घुमने के लिये कार चाहिए ,
ना गले के लिए हार चाहिए
" भगवद् गीता मे श्री कृष्णा ने
बहुत बड़ी बात कही है " !!
जीवन के उद्धार के लिए केवल
मित्र , प्रेम और परिवार चाहिए...!
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कामयाबी और नाकामयाबी
दोनो ज़िन्दगी के अहम हिस्से है
और दोनों ही किसी के जीवन
में स्थायी नही है।
हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते।
भरोसा किया जाए या नहीं,
ये जानने का सबसे आसान तरीका ये है
कि भरोसा किया जाए।
ना घुमने के लिये कार चाहिए ,
ना गले के लिए हार चाहिए
" भगवद् गीता मे श्री कृष्णा ने
बहुत बड़ी बात कही है " !!
जीवन के उद्धार के लिए केवल
मित्र , प्रेम और परिवार चाहिए...!
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